Saturday, May 30, 2009

श्रीअरविन्द का समन्वित योग मानव को अतिमानव तक पहुंचाना है

महर्षि श्रीअरविंद का सावित्री महाकाव्य

श्री अरविंद एक सिद्धहस्त लेखक थे। उनके लेखन का आरंभ भवानी-भारती, दुर्गा स्तुति तथा वंदेमातरम् से हुआ। ये उनके क्रांतिकारी जीवन की रचनाएं हैं। भारत को स्वतंत्र देखना उनके जीवन का प्रधान उद्देश्य था। अलीपुर जेल से वापस आने के बाद भगवान श्रीकृष्ण ने अब बाहर से नहीं भीतर (अंतरात्मा) से आंदोलन की आज्ञा दी तो वे पांडिचेरी चले गए जहां आजीवन योगी के रूप में प्रतिष्ठित रहे। भारत के स्वतंत्रता के निमित्त सदैव वे यहां से भी प्रयत्नशील रहे।

उनका लेखन अंग्रेजी भाषा में होता था।
दिव्य जीवन, गीता-प्रबंधन तथा श्री मां जैसे ग्रंथों के अतिरिक्त भी उनके अनेक ग्रंथ हैं जिनमें सर्वाधिक महत्व का सावित्री महाकाव्य है। यह उनकी अंतिम तथा समन्वित योग के सार तत्व की रचना है। अंग्रेजी भाषा का यह सबसे विशिष्ट महाकाव्य माना जाता है। अमेरिका में सायराकूसविश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा.पाइपर ने इस ग्रंथ के विषय में अपने विचार इस प्रकार व्यक्त किए हैं। इस महाकाव्य ने नवयुग की ज्योति का शुभारंभ कर दिया है। अंग्रेजी भाषा का यह सबसे विशिष्ट महाकाव्य है।

वस्तुत: सावित्री मनुष्य के मन को विस्तृत कर परम स्वयंभू तक ले जाने के लिए सबसे शक्तिशाली कलात्मक रचना है। यह विशाल है, भव्य है तथा इसमें रूपकों का चमत्कार है। मनुष्यों की पीढी दर पीढी इन निरंतर स्रोत से अपनी आत्मा का अमृतपानकरती रहेगी।

इसका कथानक श्रीअरविन्द ने महाभारत से लिया तथा सावित्री और सत्यवान की प्रसिद्ध कथा को लेकर मनुष्य की मृत्यु पर विजय दिखाई है। उनके ही शब्दों में-सावित्री सूर्यपुत्री है सर्वोच्च सत्य की देवी है। सावित्री का पिता अश्वपति तपस्या का अधिपति है। सत्यवान का पिता द्युगत्सेनदिव्यमनहै। वस्तुत:यह कथन रूपक मात्र नहीं है। न इसके पात्र ही मानवीय गुणों वाले ही हैं वरन् वे सजीव और चेतन शक्तियों के अवतार और विभूतियां हैं। श्री मां ने सावित्री के विषय में जो कुछ कहा है वह इस प्रकार है-उन्होंने सारे विश्व को एक पुस्तक में उतार लिया है। यह अद्भुत, भव्य और अद्वितीय पूर्णता से भरी हुई रचना है। श्री अरविन्द का योग वैज्ञानिक है। भोग सत्य का एक छोर है तो वैराग्य दूसरा। संपूर्ण सत्य वह है जो दोनों को अपने भीतर समाहित करता है और फिर दोनों से आगे निकल जाता है। सावित्री इसी तथ्य का दिग्दर्शन कराती है। डारविनका विकासवादअधूरा है। क्या प्रकृति अब आगे कोई रचना नहीं करेगी! विकास का रथ रुक जाएगा? नहीं। अब प्रकृति मानव के भीतर अतिमानव की संभावनाएं तलाश रही है।

श्रीअरविन्द का समन्वित योग मानव को अतिमानव तक पहुंचाना है। इसी के निमित्त उनकी योग साधना थी। अतिमानवीचेतना मनुष्य के मन के भीतर छिपी हुई है। अब वह प्रकट होने के समीप है। मनुष्य अगर साधना पूर्वक उस चेतना को ग्रहण करने का प्रयास करे तो अतिमानसीचेतना अवश्य उत्तीर्ण होगी। प्रकृति के पीछे जो विश्वात्मा विराजमान है उसके साथ अभिन्नतास्थापित कर अनन्त शक्ति से शक्तिमान होना है। मनुष्य के अंदर जो सुप्त देवता विद्यमान है उसको जागृत कर मनुष्य का रूपान्तर साधित करना होगा। पृथ्वी की अन्तर्निहित विराट चेतना को उद्बुद्ध कर यहीं पर स्वर्ग राज्य को स्थापित करना होगा। इस महान ग्रंथ का काव्यानुवादमहान कवयित्री विद्यावती कोकिल ने हिंदी में किया है इसी से यह हमें उपलब्ध है। डा. सरोजिनी कुलश्रेष्ठ

श्रीअरविन्द के ''भारतीय संस्कृति के आधार स्तम्भ'' पुस्तक

एनजीओ बनाम सरकार

Thursday , Apr 16,2009, 08:38:04 PM आज तो हमारी विशाल ब्यूरोक्रेसी को देखकर श्रीअरविन्द के ''भारतीय संस्कृति के आधार स्तम्भ'' पुस्तक के इस अंश की याद आती है ''प्राचीन भारतीय प्रशासनिक तंत्र का क्रमिक विकास तत्समय विद्यमान रीति रिवाजों तथा व्यवस्थाओं को ये रखकर तथा बलाए ताक में रखकर, तथा सुनिश्चित परिपाटियों का, सामाजिक व राजनैतिक पूर्वोदाहरणों का निर्वाह करते हुए ही हुआ है। इसने कभी भी जन-जीवन की स्वाभाविक मनोवृत्ति के स्थान पर उस यन्त्रचालित एवं एकांगी तंत्र को नहीं अपनाया, जो कि यूरोपीय देशों की आज दिखाई देने वाली भीमकाय नौकरशाही के रूप में सामने आई है।'' Deshbandhu, Online news portal,देशबन्धु पत्र नही ... श्री अरविन्द - विकिपीडिया

16-चिंतन्- टिप्पणी जोड़ें khorendra kumar द्वारा 23 मई, 2009 6:48:00 AM IST पर पोस्टेड # चिंतनश्रीअरविंद कहते हैकि मनुष्य जो कुछ सोचता है ,उस चिंतन के तथ्य के कारनठीक वही बन सकता है /इस तथ्य का ज्ञान की मनुष्य जो सोचता है ठीक वही बन जाता है, मनुश्य की सत्ता के विकास के लिए एक बडीमहत्वपूर्ण चाबी है -और केवल सत्ता की संभावनाओं के दृष्टिकोण से ही नही ,संयम तथा इस चुनाव के दृष्टि कोण से भी की मनुश्य क्या होना चाहता है /{श्रीअरविन्द} Savitri Era of those who adore, Om Sri Aurobindo & The Mother.

श्रीअरविन्द की भविष्यवाणी सत्य हो कर रहेगी

फिर अखण्ड होगा भारत- महर्षि अरविन्द
- ललित मोहन शर्मा
फिर एक होगा भारत

महान् क्रांतिकारी-योगिराज-महर्षि अरविन्द ने आज से 60 वर्ष पहले 1957 में यह भविष्यवाणी कर दी थी कि ''देर चाहे कितनी भी हो पाकिस्तान का विघटन और भारत में विलय निश्चित है।'' इसकी एक झलक हमें श्री अरविन्द की जन्मशताब्दी वर्ष 1972 में देखने को मिली थी। उस समय 92 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने हथियार डालकर भारतीयों के सम्मुख आत्मसमर्पण कर दिया। उल्लेखनीय है कि महर्षि अरविन्द का जन्म 15 अगस्त 1872 में को हुआ था और हमारा स्वतंत्रता दिवस भी 15 अगस्त ही है। यह मात्र संयोग ही नहीं बल्कि भगवान द्वारा श्री अरविन्द के बताए मार्ग पर चलने की स्वीकृति भी है।

15 अगस्त 1947 को देश की स्वतंत्रता प्राप्ति के अवसर पर योगिराज ने स्वयं अपने उद्बोधन में कहा कि ''भागवत शक्ति ने- जो कि मेरा पथ-प्रदर्शन करती है- उस कार्य के लिए अपनी अनुमति दे दी है और उस पर मुहर लगा दी है जिसके साथ-साथ मैंने अपना जीवन आरम्भ किया था। देश का विभाजन दूर होना ही चाहिए, वह दूर होगा या तो तनाव के ढीले पड़ जाने से या शांति और समझौते की आवश्यकता को धीरे-धीरे हृदयंगम करने से, या किसी कार्य को मिलजुलकर करने की सतत् आवश्यकता से या उस उद्देश्य की पूर्ति के लिए साधनों की जरूरतों को महसूस करने से। जिस किसी तरह क्यों न हो, विभाजन दूर होना ही चाहिए और दूर होकर ही रहेगा। उन्होंने यही बात सन् 1950 में अपने प्रिय शिष्य कन्हैया लाल माणिक मुंशी जी से भी कही थी। महर्षि ने कहा कि ''भारत फिर से एक होगा मैं उसे स्पष्ट देख रहा हूं।'' प्रस्तुतकर्ता संजीव कुमार सिन्हा पर 12:10 PM Thursday, 23 August, 2007 लेबल: 3 टिप्पणियाँ:

Shaktistambh said...
यह लेख और उस में व्यक्त विचार व भावनायें बहुत सराहनीय हैं। ऐसी भावनाओं पर हमारे तथाकथित सेक्युलरवादी तथा उदारवादी बड़ी तीखी प्रतिक्रिया करते हैं। मुझे तो उनकी अज्ञानता पर ही तरस आता है। वह यह समझने की भूल करते हैं कि मुस्लिम व अंग्रेज़ आक्रमणकारियों द्वारा भारत पर कब्ज़ा किये जाने से पूर्व भारत एक राष्ट्र था जिसमें आज का पाकिस्तान व बांग्लादेश भी सम्मिल्लित था। देश तो बनते हैं और टूटते हैं पर राष्ट्र कभी टूटता या विभाजित नहीं होता। जर्मनी व वियतनाम (और कोरिया भी) एक राष्ट्र थे पर उनका राजनैतिक व अन्य कारणों से दो देशों में विभाजन हो गया जो अप्राकृतिक था। अन्तत: दोनों देश एक हो गये। सोवियत संघ भी एक देश अवश्य था पर वह एक राष्ट्र कभी न हो सका और अन्तत: अलग-अलग देशों व राष्ट्रों में विभक्त हो गया। भारत देश का विभाजन भी राजनैतिक है, स्वाभाविक नहीं और राष्ट्र तो आज भी एक है। राष्ट्र को कोई विभक्त नहीं कर सकता। भारत के साथ भी वही होगा जो जर्मनी और वियतनाम में हुआ। भारत पुन: एक हो कर रहेगा और श्री अरविन्द की भविष्यवाणी सत्य हो कर रहेगी। 23 August, 2007 7:26 PM Post a Comment Savitri Era of those who adore, Om Sri Aurobindo & The Mother.

Tuesday, April 14, 2009

Engine of growth is still going strong in Indirapuram

Indirapuram realty still buzzing with activity
Economic Times - 3 Apr 2009, 0603 hrs IST, Vivek Shukla, ET Bureau

Even though real-estate market is facing crunch time across the country, the engine of growth is still going strong in Indirapuram. While it is true that the slump has also hit this bustling area, it has managed to withstand the onslaught of slump... As of now, projects of several builders like Gaursons, SVP Group, Mahagun, Amrapali, Ashiana, Parsvnath, Express Builders, Krishna Apra, Jaipurias, Agarwal Associates and SVP Group are in various stages of completion or are already completed. The best thing about Indirapuram is that all these facilities be it malls, hospitals or schools are all in a radius of a few kilometres...

Indirapuam is still seeing activity in the realty market, owing principally to the prices, which are lower than those prevailing at Noida and Gurgaon ,“ says Amit of Supertch. Generally, in societies the prices start from a range of Rs 2,900 to Rs 3,200 per sq ft... There are no dearth of hospitals, clinics, malls and schools in and around Indirapuram. Moreover, there are several plans in the pipeline to widen NH-24 and develop Habitat Centre on the lines of India Habitat Centre in Delhi.

Friday, March 13, 2009

योगीराज श्रीअरविन्द के प्रसिद्ध महाकाव्य ‘सावित्री’ का गद्य में यह सरल हिन्दी भावानुवाद

सावित्री
श्रीअरविंद
प्रकाशक: राजपाल एंड सन्स
सारांश: प्रस्तुत हैं पुस्तक के कुछ अंश
योगीराज श्रीअरविन्द के प्रसिद्ध महाकाव्य ‘सावित्री’ का गद्य में यह सरल हिन्दी भावानुवाद है जिसे हिन्दी के पुराने और प्रतिष्ठित लेखक व्योहार राजेन्द्रसिंह ने प्रस्तुत किया है।इस महत्त्वपूर्ण काव्य में सावित्री-सत्यवान की पुराण-कथा के माध्यम से कवि ने अपने दर्शन तथा इस पृथ्वी पर महामानव के अवतरण की अपनी विशिष्ट कल्पना को व्यक्त किया है। यह महाकाव्य बड़ा भी बहुत है, इसलिए मूल में इसका संपूर्ण वाचन और मनन सभी के लिए संभव नहीं है। इस भावानुवाद में संक्षेप में काव्य कथा और उसके भीतर निहित भावना, जितना संभव हो सकता था उतने सरल शब्दों में, सामान्य पाठकों के लिए प्रस्तुत की है।मूल पाठक के बाद ‘सावित्री’ के कतिपय अंशों के कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा किये गये काव्यानुवाद ‘सावित्री’ की रचना-प्रक्रिया और विचार-भूमि से संदर्भित श्रीअरविंद के पत्र तथा सावित्री का महत्त्व निरूपण करता श्रीमां का वक्तव्य आदि बहुमूल्य-उपयोगी संदर्भ-सामग्री भी दे दी गई है, जिसमें यह पुस्तक स्थायी महत्त्व की ओर संग्रहणीय बन गई है।
भूमिका
‘सावित्री’ श्रीअरविन्द का महाकाव्य है जिसे उन्होंने अपने आश्रम के एकान्तवास में लिखा था। उनकी अन्तिम रचना है। वैसे तो प्रारम्भ काल से ही उन्होंने अंग्रेजी में कविता करने में दक्षता प्राप्त कर ली थी। किन्तु आश्रम में उनका पूर्ण विकास हुआ। ‘सावित्री का कथानक महाभारत में 18 श्लोकों में दिया गया है। उसी का आधार लेकर उन्होंने 11 पर्वों और 41 सर्गों में यह महाकाव्य समाप्त किया है। इसमें 10 हजार पंक्तियाँ है। सावित्री ईश्वरीय कृपा की प्रतीक है जो कि सत्यवान रूपी जीव को ईश्वर तक पहुँचाने के लिए अवतरित होती है। वह जीवात्मा को परमात्मा से मिलाकर और फिर पृथ्वी पर वापस आकर स्वर्ग का राज्य स्थापित करती है। श्रीअरविन्द का दावा है कि ‘सावित्री’ बौद्धिक नहीं, अन्तः प्रेरित (intutional) काव्य है जिसकी कुछ पंक्तियाँ ही नहीं, पृष्ठ के पृष्ठ ईश्वरीय प्रेरणा से लिखे गए हैं।
प्रतीक काव्य
श्रीअरविन्द ने कहा है कि मुझे ऐसा लगता था कि इसकी पंक्तियाँ ऊपर से उतरती चली आ रही हैं और मुझसे लिखवाई जा रही हैं। सावित्री एक प्रतीकात्मक काव्य है। साहित्य-समालोचक कहते हैं कि कवि की विशेष प्रतिभा बिम्बों का सृजन करने में है। ये बिम्ब प्रतीकात्मक भाषा में व्यक्त होते जा रहे हैं जो कवि की सर्जनात्मक प्रेरणा अथवा सृजन शक्ति के रूप में प्रकट होती है। ये बिम्ब वहीं तक प्रभावशाली और यथार्थ होते हैं। जहाँ वे कवि के अनुभव या उस चेतना की अवस्था को प्रकट करते हैं। जब ये बिम्ब यथार्थ होते हैं तब वे प्रतीक बन जाते हैं। वह कविता केवल अनुभव मात्र नहीं रह जाती किन्तु प्रभावशाली अभिव्यक्ति बन जाती है। श्रीअरविन्द इसको ‘अनिवार्य शब्द’ तथा ‘प्रेरक’ कहते हैं। अंग्रजी कवि ए० ई० अपने दर्शन के अनुभव को यथार्थ अप्रत्यक्ष मानते हैं। उसके सम्बन्ध में श्री अरविन्द कहते हैं-‘‘दर्शन कवि की एक विशेष शक्ति है, जिस प्रकार विवेक तत्त्ववेत्ता का विशेष वरदान है और विश्लेषण वैज्ञानिक की स्वाभाविक देन है।’’ यही दर्शन की शक्ति, अपने अनुभव के सत्य का दर्शन अथवा अतिमानस सत्य, जो कि प्रतीक के रूप में प्रकट होता है, कवि को आत्म-प्रकाशन की शक्ति प्रदान करता है। इसलिए कवि सृजन करता है अथवा अपनी कल्पना से ऐसा बौद्धिक प्रतीक निर्माण करता है जो पाठकों को कवि का अभिप्रेत अर्थ समझाता है। कालिदास मेघ को दूत बनाकर और शैली स्काईलार्क पक्षी को प्रतीक बनाकर अपनी बात कहते हैं। ये प्रतीक कैसे उत्पन्न होते हैं, यह कवियों, आलोचकों और मनोवैज्ञानिकों के लिए एक समस्या बन गई है। कुछ लोग इसकी उत्पत्ति अवचेतन और सामूहिक अचेतन से मानते हैं किन्तु उससे हमारा पूरा समाधान नहीं होता। दे लुई (Day Lewis) अपनी ‘पोयटिक इमेज’ (Poetic Image) नामक पुस्तक में कहते हैं कि काव्योप्तति की प्रणाली एक रहस्य है क्योंकि कवि की चेतना एक बहुत संश्लिष्ट वस्तु है। इसकी चेतना के अनेक स्तर होते हैं जिनमें काव्य का स्रोत रहता है। काव्यात्मक प्रतीक भी अनेक प्रकार के होते हैं और अनेक स्तरों पर दीख पड़ते हैं। जितने ऊँचे स्तर से वह प्रतीक देखा जाता है उतनी ही सार्थकता उसमें रहती है। जितने सम्बन्ध में श्रीअरविन्द ने लिखा है ‘‘प्रतीक अनेक प्रकार के होते हैं। प्रतीकों का अनेक प्रकार से बौद्धिक अर्थ किया जा सकता है।’’ जान बनियन की ‘पिल्ग्रिम्स प्रॉग्रेस’ एक रूपक है। शैली का ‘प्रॉमेथियस अनबाउण्ड’ भी इस प्रकार का रूपक है।प्रतीक के कार्य के संबंध में श्रीअरविन्द एक जगह लिखते हैं—‘‘प्रतीक से कोई अव्यक्त वस्तु या विचार प्रकट नहीं होते अपितु एक जीवित सत्य, आन्तरिक दर्शन या अनुभव प्रकट होता है। यह दर्शन इतना सूक्ष्म होता है कि वह बौद्धिक अव्यक्त से भी परे होता है। प्रतीकात्मक बिम्बों के सिवा उसे व्यक्त करना कठिन होता है।’’ कभी-कभी यह भी कहा जाता है कि प्रतीक प्राचीन कवियों के लिए ही उपयुक्त था, वह आधुनिक भावबोध के कवियों के उपयुक्त नहीं है। किन्तु तथ्य इसके विरूद्ध है। ब्लेक आदि प्राचीन कवियों ने ही प्रतीक का प्रयोग नहीं किया, वर्तमान कवियों ने भी इसका प्रयोग किया है। टामसन के ‘हाउण्ड’ आव हेवेन’ में दिव्य प्रेम आर मानव आत्मा का प्रतीकात्मक वर्णन है। डल्ल्यू बी ईट्स और ए० ई० अपनी कविताओं और नाटकों में प्राचीन प्रतीकात्मक कथाओं का प्रचुर उपयोग किया करते हैं। लुई और हरबर्ट रीड के काव्य भी प्रतीकात्मक हैं। इसी परम्परा में श्रीअरविन्द की ‘सावित्री’ महान् काव्य हैं। ‘सावित्री’ के पहले भी उन्होंने बहुत-सी छोटी और बड़ी कविताएं लिखी थीं। जिनमें प्रतीकों का उपयोग किया गया था।
आध्यात्मिक महाकाव्य
सावित्री शब्द ‘सवित्र’ से बना है। इसमें ‘सु’ धातु है जिसका अर्थ है, उत्पन्न करना। सोम शब्द भी ‘सु’ धातु से बना है जिसका अर्थ है उत्साहवर्धन प्रेम अथवा आत्मिक आनन्द। इस प्रकार सावित्री का अर्थ है-सर्जक, सृष्टि को उत्पन्न करने वाला। वेदों में सविता प्रकाश ओर सृजन का देवता है। उसका पार्थिव प्रतीक हमारा सूर्य है जो समस्त सौरजगत को प्रकाशित और पोषित करता है। इस प्रकार ‘सावित्री’ का अर्थ होगा-साविता की पुत्री अथवा दैवी सर्जक की शक्ति। ‘सावित्री’ महाकाव्य सावित्री दैवी का प्रतीक है, जो मानव रूप में अवतरित होकर मानवात्मा को अपने दैवी लक्ष्य की ओर ले जाती है। सत्यवान का अर्थ है- जिसके पास सत्य है अथवा जो सत्य पाना चाहता है। इस काव्य में सावित्री के पिता अश्वपति को जीवन-स्वामी माना गया है। वेदों में अश्व जीवनी शक्ति का द्योतक है, अतः अश्वपति का अर्थ जीवन का स्वामी ही हो सकता है। ‘सावित्री में राजा अश्वपति पृथ्वी पर अवतरित जिज्ञासु आत्मा का प्रतीक है। सावित्री की कथा महाभारत अरण्य पर्व अ, 208 पर आधारित है। श्रीअरविन्द ने वह कथा ज्यों की त्यों रक्खी है, केवल उसे प्रतीकात्मक बना दिया है, उसे जीवित प्रतीक में बदल दिया है। प्रथम पर्व के एक कोने से तीन सर्गों में कवि ने अपनी विश्व-सृजन सम्बन्धी मान्यता का वर्णन किया है। अश्वपति का चरित्र विश्व-सृजन सम्बन्धी मान्यता का वर्णन किया है। अश्वपति का चरित्र भी उसी में वर्णित है। सत्यवान के लिए अश्वपति की तपस्या को कवि ने आत्मज्ञान और विश्वज्ञान की प्राप्ति के लिए जिज्ञासु मानवता की खोज के रूप में चित्रित किया गया है। द्वितीय पर्व में अश्वपति विश्व के विभिन्न स्तरों से ऊपर उठते हुए उच्चतर मानस तथा उच्च ज्ञान के स्तर तक पहुँच जाता है। उसके हदय में जिज्ञासा की अग्नि प्रज्ज्वलित है। अश्वपति इस पृथ्वी पर सतयुग लाना चाहते हैं। मानव चेतना कितना महान ज्ञान अर्जित कर सकती है, वह कितनी गहराई और ऊँचाई तक जा सकती है, यह अश्वपति की तपस्या से प्रकट होता है। जितनी अधिक पूर्णता इस पृथ्वी पर लाना सम्भव है। उसकी प्राप्ति के लिए उसका हृदय छटपटाता है। तृतीय पर्व में अश्वपति विश्व के ऊपर प्रवेश कर अनुभव प्राप्त करता है और सृजनशक्ति के आमने-सामने पहुँच जाता है। वह आत्मा के दिव्य लोक के दर्शन करता है जहाँ सत्य शक्ति और चेतना दिव्य आनंद और समरसता एक साथ मौजूद हैं। वह इन सब तत्त्वों को पृथ्वी पर उतारना चाहता है, पृथ्वी पर दिव्य राज्य लाना चाहता है। दैवी शक्ति से उसे वरदान प्राप्त होता है कि अन्धकार व अज्ञान शक्तियों को जीतकर सत्य को मानव जगत् में उतार सके। दैवी शक्ति उसे वरदान देती है कि उसकी कृपा पृथ्वी पर अवतरित होगी।इस प्रकार सावित्री का पृथ्वी पर जन्म होता है। सन्तान-कामना की एक सामान्य कथा को श्रीअरविन्द ने यह दिव्य रूप दिया है। अश्वपति की यात्रा अचेतन से चेतन के उच्च स्तर पर पहुँचने की यात्रा है। इसकी कठिनाई मानवात्वा द्वारा अनुभूत विघ्न-बाधाएँ हैं जो उसे सत्यवान की प्राप्ति में सामने आती हैं और उसकी सफलता मानव-जाति के द्वारा सत्य की प्राप्ति की सफलता है। सावित्री भी केवल महाभारत की एक सामान्य राजकुमारी न रहकर दिव्य कृपा की अवतार बन जाती है। वह मानव के दुःखों और अपमानों को सहकर अन्धता और मृत्यु पर विजय प्राप्त कर दिव्यलोक की प्राप्ति करती है। वह यमराज का सामना कर अपने पति सत्यवान को मृत्युपाश से छुड़ाती है। अपनी अमरता और अनन्तता के विस्तार से ही वह यह विजय प्राप्त करती है। सावित्री का जन्म, बाल्यकाल, पति के वरण की उसकी यात्रा, सत्यवान से मिलन वापस आने पर नारद से मिलन आदि कथाएं ज्यों की त्यों रक्खी गई हैं। अन्तर इतना ही है कि श्रीअरविन्द की सावित्री अपनी मनुष्यता के साथ अपनी दिव्यता का भी एक साथ अनुभव करती है। नारद-सावित्री-संवाद में कवि ने विश्वनियन्ता का उद्देश्य तथा मानव के अदृश्य और कर्म सिद्धान्त को उच्च शिखर पर पहुँचा दिया है। सावित्री के 4 से 6 पर्वों में दैवी माता द्वारा दिए गए वरदान की महत्ता प्रदर्शित की गई है। यम-सावित्री केवल मानव-जाति की प्रतिनिधि नहीं है। अपितु दैवी कृपा की भी अवतार है। यम कुटिलता, प्रलोभन, छल आदि को उपस्थिति करने वाले अज्ञान का प्रतिनिधि है। सारा संवाद उच्च के उच्चतर स्तर पर उठता चला जाता है। उसमें अतिमानस क्षेत्र की ज्योति और आत्मप्रेरणा की चमक बीच-बीच में कौंध जाती है। एक छोटे-से कथानक को कितना विस्तृत और उच्च शिखर तक पहुँचाया जा सकता है, इसका प्रमाण है ‘सावित्री’ महाकाव्य। उसमें मनोवैज्ञानिक तथ्य भरे हुए हैं, जिससे मानव-विकास हो सकता है। महाकवि की यही उन्नयन कला है, जो मानवीय है। मृत्यु पर विजय प्राप्त कर सावित्री का प्राचीन कथानक समाप्त हो जाता है। पिता का राज्य प्राप्त कर सावित्री और सत्यवान राज्य-सुख भोगने लगते हैं। किंतु श्रीअरविन्द की ‘सावित्री’ में वे दोनों मृत्यु का राज्य पार कर अन्नत दिवस के राज्य में प्रवेश करते हैं जहाँ कि सत्य का सूर्य कभी अस्त नहीं होता, जहाँ अज्ञान और मृत्यु का कोई स्थान नहीं है। वहाँ कुछ काल ठहरकर वे दोनों पृथ्वी की ओर देखते हैं दैवी कार्य पूर्ण करने के लिए लौट पड़ते हैं- वह कार्य है नवीन मानवता का सृजन। यही ‘सावित्री’ की सबसे बड़ी विशेषता है। सावित्री महाकाव्य के सम्बन्ध में कुछ लोगों को अध्यायों की संगति लगाने में कठिनाई होती है। प्रथम पर्व का प्रथम सर्ग उषःकाल के रूपक से प्रारम्भ होता है। उसमें आत्मा प्रकृति में प्रवेश करती है, जैसे अन्ध रजनी के बाद सूर्य का उदय होता है। इसमें हम सावित्री को अपने जीवन की मुख्य समस्या का सामना करते हुए देखते हैं। सत्यवान की अचानक मृत्यु से वह स्तम्भित है। उसके सामने पृथ्वी, प्रेम और काल खड़ा हुआ है। उसके हृदय में यम का सामना करने के लिए विश्वव्यापी दुःख उदय होकर उसकी शान्ति और शक्ति की परीक्षा लेता है। दूसरे पर्व में सावित्री के हृदय की आन्तरिक प्रक्रिया बतलायी गई है। विशेष अध्यायों में कवि हमें सावित्री के जन्म के पूर्व अश्वपति के राज्य में ले जाता है, उनमें हमें अश्वपति के आन्तरिक जीवन के संघर्ष और सिद्ध के दर्शन मिलते हैं, जिससे सावित्री का जन्म होता है। सिद्धि के सर्वोच्च शिखर पर पहुँचकर वह पृथ्वी पर उतरते हैं। उनको आदेश मिलता है कि वे मनुष्य जाति की पूर्णता के लिए प्रयत्न करें। इस प्रयत्न में उन्हें दैवी कृपा की सहायता मिलेगी जिससे मनुष्य की समस्या हल होगी। अश्वपति के इस दिव्य यात्रा के वर्णन से ही सावित्री महाकाव्य के दूसरे और तीसरे पर्व भरे हुए हैं। मुख्र्य पृष्ठ

Thursday, March 12, 2009

बड़ोदा नगर का संबंधा दो अध्दितीय प्रतिभाओं - श्रीअरविंद घोष और श्री भीमराव अम्बेडकर की स्मृति के साथ जुड़ा है

LK Advani - Portal - आज हम बड़ोदा में मिल रहे हैं, इस नगर का संबंधा आधाुनिक युग की दो अध्दितीय प्रतिभाओं-श्रीअरविंद घोष और श्री भीमराव अम्बेडकर की स्मृति के साथ जुड़ा है। श्री अरविंद एक क्रांतिकारी ... 2008 जुलाई 23 - सारा जगत स्वतंत्रताके लिये लालायित रहता है फिर भी प्रत्येक जीव अपने बंधनो को प्यार करता है। यही हमारी प्रकृति की पहली दुरूह ग्रंथि और विरोधाभास है। - श्री अरविंद ...

Dainik Mahamedha - ... लेकिन जिन्होने अपना रोम-रोम इस देश के लिए समर्पित कर दिया उनमें आजादी के महान योद्धा और मनीषी श्री अरविंद की आध्यात्मिक उत्तराधिकारी मदर मीरा रिचर्ड अल्फासा सबसे ऊपर हैं। ... अध्यात्म - श्रीमाँ-श्रीअरविंद के वचन lalit sahu द्वारा 17 जनवरी, 2008 5:02:00 PM IST पर पोस्टेड. पूर्ण आनंद की अवस्था. श्रीमाँ-श्रीअरविन्द के वचन... सृजनगाथा । मीडिया - दक्षिण भारत में ... - पांडिच्चेरी (पुदुच्चेरी) प्रदेश में स्वाधीनता आंदोलन के आध्यात्मिक नेता महात्मा श्री अरविंद के आश्रम से चौथे दशक में हिंदी पत्रिका ‘अदिति’ के प्रकाशन के साथ ही हिंदी ...

श्रीअरविंद के सम्पूर्ण मिशन को लगातार आगे बढ़ाती रहने वाली मदर मीरा

इग्नू में श्री अरविंद पर पीएचडी ... - इग्नू में श्री अरविंद पर पीएचडी कार्यक्रम शुरू. Sify.com - इदिंरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्याल (इग्नू) ने श्री अरविंद पर डाक्टरेट ... राजशेखरन पिल्लै ने कहा श्री अरविंद के विचारों पर गहन अध्ययन और शोध कराने के उद्देश्य से इस ... प्रसन्नचित्त, बनावटी मुस्कान, असली ... - ... अध्येता सुश्री श्रुति बिदवईकर ने यहां यूनीवार्ता को बताया कि 1998 से कार्यरत साकार की शैक्षणिक शाखा के रूप में ‘पुडुचेरी’ (पॉन्डिचेरी) में ‘श्री अरविंद दर्शन- द यूनिवर्सिट.

Savitri - A Hindi Book by - Sri Arvind - सावित्री ... - मूल पाठक के बाद ‘सावित्री’ के कतिपय अंशों के कवि सुमित्रानंदन पंत द्वारा किये गये काव्यानुवाद ‘सावित्री’ की रचना-प्रक्रिया और विचार-भूमि से संदर्भित श्री अरविंद के पत्र तथा ... भारत की दीवानी थी प्रांस की मीरा - ... मीरा ने स्वयं कई बार उल्लेख किया है कि बचपन में सपने में जिस व्यक्ति को कृष्ण के रूप में देखती रहीं थी भारत में आकर जब श्री अरविंद को देखा तो उन्हें लगा वही तो हैं उनके कृष्ण ... ... - नवम्बर 1926 में श्री अरविंद के ध्यान में जाने के बाद 17 नवम्बर 1972 को अपने देह त्याग तक पाण्डिचेरी आश्रम और श्री अरविंद के सम्पूर्ण मिशन को लगातार आगे बढ़ाती रहने वाली मदर मीरा ने ...

Amar Ujala Dharam Karam Section - श्री अरविंद ने 40 वर्षों (1910-1950) तक पांडिचेरी में रहकर आदिमानस के अवतरण और पृथ्वी की चेतना के ... श्री अरविंद की देह से 111 घंटे तक निरंतर स्वर्णिम प्रकाश निकलता रहा, जिसे वहां ... श्रीअरविंद का जन्म कलकत्ता के समृद्ध डॉक्टर कृष्णधन घोष के घर 15 अगस्त 1872 में हुआ। ... जब बंग-भंग काल आया तब श्रीअरविंद ने बड़ौदा की नौकरी छोड़ दी और सक्रिय राजनीति में कूद पड़े ...

Jagran - Yahoo! India - Dharm Marg - श्री अरविंद एक सिद्धहस्त लेखक थे। उनके लेखन का आरंभ भवानी-भारती, दुर्गा स्तुति तथा वंदेमातरम् से हुआ। ये उनके क्रांतिकारी जीवन की रचनाएं हैं। भारत को स्वतंत्र देखना उनके ... Jagran - Yahoo! India - News - श्री अरविंद आश्रम के एडवेंचर यूथ कैंप में पहुंचे दिल्ली के स्कूली बच्चे. Mar 26, 02:15 am. नैनीताल। ... संचालन दिल्ली स्थित श्री अरविंद आश्रम के निरंकार अग्रवाल कर रहे है। ...

Hindi Samachar - महान क्रांतिकारी एवं दार्शनिक श्री अरविंद घोष हिटलर के फासीवाद को आसुरी शक्ति मानते ... श्री अरविंद के दर्शन की अध्येता श्रीमती कल्पना बिडवईकर ने कल यहां वरिष्ठ नागरिक संघ ... Hindi Samachar - ‘श्री अरविंद सेन्टर फॉर एडवान्स्ड रिसर्च’ (साकार) से जुड़ी शोध अध्येता सुश्री श्रुति बिदवईकर ने यहां यूनीवार्ता को बताया कि 1998 से कार्यरत साकार की शैक्षणिक शाखा के रूप में ...

Nava Bharat - Bhopal - इन चुनौतियों से निपटने में योगीराज श्री अरविंद की विचारधारा ही सहायक हो सकती है. ... मौका था राज्य की साहित्य अकादमी द्वारा गुरुवार से शुरू की गई श्री अरविंद स्मृति व्याख्यान ... Nava Bharat - Bhopal - यहीं उन्होंने श्री अरविंद के दर्शन किए और उनके तनिक संपर्क से ही उन्हें ज्ञात हो गया कि वही श्री ... माताजी की मूक अर्चना को श्री अरविंद ने ही समझा, उनकी आध्यात्मिक ऊंचाइयों को ...

Amar Ujala Dharam Karam Section - एक बड़े हॉल में श्री मां और श्री अरविंद की तसवीरें रखी हैं। लगभग सौ लोग संगीत लहरियों ... श्री अरविंद और श्री मां के प्रति श्रद्धा से वशीभूत कई मेहमान भी इस आयोजन में शामिल होने ... Amar Ujala Dharam Karam Section - श्रीअरविंद समय-समय पर राष्ट्र भक्ति तथा मातृभूमि को विदेशी दासता से मुक्ति के ... श्री अरविंद को अनुभूति हुई कि श्रीकृष्ण उनसे कह रहे हैं, ‘ऐसे निश्छल व्यक्ति की सेवा करके तुम ...

panchjanya.com 1-8-1999 - समारोह को सम्बोÊधत करते हुए श्री श्रद्धालु रानडे ने कहा Êक श्री अरविंद ने कहा था Êक भारत का Êवभाजन अस्थायी है और इसे एक Êदन समाप्त होना ही है। ई·ार ने भारत को दो मंत्र Êदए हैं। ... उनकी और श्री अरविंद की जब पहली भेंट हुई तो दोनों काफी देर तक बैठे रहे। ... १९१४ में श्री अरविंद ने एक बात कही और श्रीमां का भी वही मत था। उन्होंने कहा था Êक Êहन्दुस्थान के Êलए ...

महर्षि अरविंद को पत्र - मुझे लगा कि श्री अरविंद ने मेरा पत्र पढा नहीं होगा । बडी हस्तीयों को खत लिखनेवालों के साथ अक्सर होता ... उन्हें लगा होगा की श्री अरविंद को एसे खत के बारे में बताना जरूरी नहीं, ... Savitri, Orient paperbacks - योगीराज श्री अरविंद के प्रसिद्ध महाकाव्य 'सावित्री' का गघ में यह सरल हिन्दी भावानुवाद है जिसे हिन्दी के पुराने और प्रतिष्ठित लेखक व्योहार राजेन्द्रसिंह ने प्रस्तुत किया है। ...

Sunday, February 01, 2009

श्रीअरविंद ने देश को भवानी-भारती के रूप में स्थापित किया

विवेकानंद ने स्वदेश मंत्र दिया और कहा कि जिन्हें तुम नीच, चांडाल, अब्राह्मण कहते हुए दुत्कारते हो , वे सब तुम्हारे रक्त बंधु, तुम्हारे भाई हैं , जब उन्होंने बचपन, यौवन और वार्धक्य के अध्यात्म को भारत के रंग में रंगा, जब अरविंद ने देश को भवानी-भारती के रूप में स्थापित किया तो वे सब अपने समय की धारा को बदल रहे थे, सड़ चुकी परंपराओं के विरूद्ध चट्टान बने थे। बुझ चुके चिरागों के थके हुए दीपदान हमारा पथ आलोकित नहीं कर सकते। हिसाब मांगने का वक्त अब है। Tarun Vijay - http://tarun-vijay.blogspot.com/ Posted by Tarun Vijay at 3:48 AM 1 comments

Wednesday, December 31, 2008

In Delhi/NCR, the Trans-Yamuna zone of Indirapuram is where the action is

2009

Back to basics: realty ads take a U-turn Hindustan Times, India - 26 Dec 2008 In Delhi/NCR, the Trans-Yamuna zone of Indirapuram is where somewhat cheaper flats are on offer. Supertech has radio ads for two-bedroom apartments for Rs 21.25 lakhs at Crossings Republik in Indirapuram, while Gaursons is peddling one for Rs 24.45 ...

Amrapali in top gear Economic Times, India - 13 Dec 2008 Customers are treated to a site of a scale model of the second phase of the Amrapali Village complex where they witness the proximity to the national highway going to Hapur from Indirapuram. They also get a chance to look at the large green belt ...

Indirapuram School of Music & Dance Musicology.co.in Indirapuram.com Foodiebay.com Restaurant directory in NCR Maya Estate Kartavyabodh

Tuesday, December 23, 2008

सभी स्थानो के निवासियों के लिए स्थानिय भाषा में जानकारियां जुटाने का प्रयास

विकिपीडिया को अपना समर्थन दें। जिसमें इस ग्रह पर हर एक व्यक्ति सभी डेटा का योग करने के लिए स्वतंत्र पहुँच दी जाती है एक ऐसी दुनिया के बारे में सोचो। जिमी वेल्स
— विकिपीडिया के संस्थापक।

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आज विश्व भर में लाखो लोग विकिपीडिया पर कुछ नया सीख रहे होंगे। एक गैर -लाभकारी संस्था में वैश्विक स्वयंसेवक होने के नाते, हम नि:शुल्क और विज्ञापनो से रहित, सभी स्थानो के निवासियों के लिए स्थानिय भाषा में जानकारियां जुटाने का प्रयास कर रहे हैं। आपका दिया हुआ दान विकिपीडिया के संचालन में सहायक सिद्ध होगा तथा इसे आपके लिए और लाभकारी बनाएगा।

विकिपीडिया, विकिमीडिया फाउंडेशन द्वारा संचालित हैं जो ५०१(सी)(३) के अन्तर्गत सैन फ्रांसिस्को,कैलिफोर्निया में स्थित एक कर-मुक्त सेवाकारी संस्था हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में आप अपना दान संघराज्यकर (federally-taxable) आय मे से घटा सकते हैं। सभी क्रेडिट कार्ड दान को पेपॉल (Paypal) द्वारा लिया जाएगा।

Monday, December 22, 2008

यह इत्तेफाक ही है कि आजादी मिलने से ७५ साल पहले १५ अगस्त को ही महर्षि अरविंद पैदा हुए थे

राजनीति के हाथ में सांप्रदायिकता की तलवार
BY Dr. MANDHATA SINGH, KOLKATA

प्रख्यात स्वाधीनता प्रेमी और आधायात्मिक विभूति महर्षि अरविंद ने भारत को आजादी मिलने के वक्त ही सांप्रदायिकता और अखंडता के उन खतरों से देश को आगाह किया था, जिसकी चुनौती आज भी भारत झेल रहा है। यह इत्तेफाक ही है कि आजादी मिलने से ७५ साल पहले १५ अगस्त को ही महर्षि अरविंद पैदा हुए थे। प्रथम स्वाधीनता दिवस के मौके पर एक संदेश में उन्होंने कहा था-- हिंदू-मुसलमानों के बीच प्राचीन सांप्रदायिक वर्गीकरण अब देश के स्थायी राजनीतिक विभाजन के रूप में सुदृढ़ होता प्रतीत हो रहा है।..........यदि यह स्थिति जारी रहती है तो भारत गंभीर रूप से विकलांग और कमजोर हो जाएगा। हमेशा जनता में फूट, एक और आक्रमण या विदेशियों के विजय की भी आशंका बनी रहेगी।

महर्षि अरविंद के ये वक्तव्य आज भी प्रासंगिक हैं। आजादी मिलने के ६० साल बाद भी भारत इन्हीं आशंकाओं के चक्रव्यूह में फंसा हुआ है।लेकिन सिर्फ हिंदू-मुस्लिम ही नहीं बल्कि जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषाई सांप्रदायिकता के स्थायी संकट में फंसा हुआ है। दुखद यह है कि सत्ता की राजनीति के यही सांप्रदायिक तत्व प्रमुख हथियार बने हुए हैं। राजनीति के हाथ में सांप्रदायिकता की यह तलवार देश की एकता और अस्मिता को विध्वंश करने पर तुली है। इसके साए में अब हर किसी की पहचान ही सांप्रदायिक हो गई है। ... read more »

एक था बाहरी ताकतों से खतरा और दूसरा सांप्रदायिकता की चुनौती

महर्षि अरविंद ने किया था खतरे से आगाह
जागरण Dec 04, 02:37 pm नई दिल्ली।

आजादी के आंदोलन में एक समय अपने उग्र विचारों के कारण बेहद लोकप्रिय नेता और बाद में आध्यात्म के क्षेत्र में जाने वाले महर्षि अरविंद ने देश की आजादी के समय ही आगाह कर दिया था कि भारत की एकता को बाहरी ताकतों से खतरा है।

विशेषज्ञों के अनुसार अरविंद ने भले ही आध्यात्म के क्षेत्र में आने के बाद सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था, लेकिन उस दौरान भी उनका मन भारत और उसकी आजादी की सलामती के बारे में ही लगा रहता था। सक्रिय राजनीति से हटने के बाद उनके द्वारा लिखे गए साहित्य में भारत के सामने आने वाली तमाम चुनौतियों का जिक्र किया गया है।

दिल्ली के अरविंद आश्रम से संबद्ध और कर्मधारा पत्रिका के सह संपादक त्रियुगी नारायण ने बताया कि आज भारत को बाहरी ताकतों के कारण जिन खतरों का सामना करना पड़ रहा है अरविंद ने उसके बारे में बहुत पहले ही आगाह कर दिया था, लेकिन देश के कर्णधारों ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त 1947 को देश को आजादी मिलने के अवसर पर तिरुचिरापल्ली रेडियो स्टेशन के जरिए दिए गए अपने संदेश में भारत को दो-दो चीजों के प्रति आगाह किया था। इनमें से एक था बाहरी ताकतों से खतरा और दूसरा सांप्रदायिकता की चुनौती। आज यही दोनों समस्याएं भारत के लिए सिरदर्द बनी हुई हैं। बाद में बड़ौदा की राजकीय नौकरी छोड़कर अरविंद का सक्रिय रूप से राजनीति में आगमन हुआ।

साहित्य कार्य जारी रहने के साथ- साथ उन्होंने गुप्त क्रांतिकारियों के संगठनों से भी नाता बनाए रखा। 1907 में कांग्रेस सूरत अधिवेशन में उग्रपंथियों और नरमपंथियों का विभाजन हुआ। उग्रवादियों द्वारा अरविन्द की अध्यक्षता में अलग आंदोलन किया गया। अरविन्द को 1908 में अलीपुर के चर्चित षड्यंत्र में गिरफ्तार किया गया। जेल में उन्हें दीर्घ अवधि तक आध्यात्मिक अनुभव हुए। 1909 में जेल से रिहाई के एक वर्ष बाद सक्रिय राजनीति से संन्यास लेकर अरविंद पांडिचेरी चले गए। पांडिचेरी प्रवास में अरविंद ने आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ साहित्य सृजन का काम जारी रखा।

इसी दौरान उन्होंने अति मानस सिद्धांत दिया, जो आधुनिक भारतीय दर्शन का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत माना जाता है। पंद्रह अगस्त 1947 को उनके 75वें जन्म दिवस पर देश को आजादी मिली। अरविंद का देहावसान पांच दिसंबर 1950 को हुआ। अरविंद का अंग्रेजी में लिखा महाकाव्य सावित्री एक महत्वपूर्ण रचना है। द लाइफ डिवाइन, लाइट्स आन योग, बैसेज आन योग, एसेज आन गीता उनके दार्शनिक विषयों पर लिखे गए अन्य चर्चित ग्रंथ हैं।

Friday, December 05, 2008

Annual Conference of Sri Aurobindo Society (Hindi Zone) in Noida on 6 & 7 December 2008

Upcoming Event: Annual Conference (Hindi Zone) 2008:

Annual Conference of Sri Aurobindo Society (Hindi Zone) is being organised in Noida on 6 & 7 December 2008. Apart from the organisational meeting of the delegates, three sessions on 'Indian Culture' will be held. For more details, please contact Dr. S.C. Tyagi, Ramjiwan Nagar, Chilkana Road, Saharanpur-247 001 (Ph : 0132-2653877) or Shri Suresh Gupta, Sri Aurobindo Bhawan, C56/36, Sector-62, Noida-201 301 (Ph : 0120-3263313). All are cordially invited. [3:44 PM]

Wednesday, August 13, 2008

136th Birthday of Sri Aurobindo at Sri Aurobindo Society, Noida Branch

From: "suresh gupta" scgsantosh@yahoo.com To: Tusar Mohapatra tusarnmohapatra@mail.com Subject: INVITATION: PROGRAMMES AT SRI AUROBINDO BHAWAN ON 15TH AUGUST, 2008 Date: Mon, 11 Aug 2008 02:16:44 -0700 (PDT) Dear Sir,

To celebrate the 136 Birthday of `Sri Aurobindo' and the 61th Anniversary of India's Independence, the following programmes are scheduled to be held at Sri Aurobindo Bhavan :
Day : Friday Date : 15th August, 2008 Venue : Sri Aurobindo Bhavan, C-56/36, Sector 62, Noida-201301 Programme 9.30 a.m. to 9.50 a.m.
Special Collective Meditation will be held at Sri Aurobindo Bhavan from 9.30 A.M. to 9.50 A.M.

10.00 a.m.
Flag Salutation and National Anthem.
10.10 a.m.
Inauguration of Homeopathy Dispensary
10.15 a.m. to 11.30 a.m.
Celebration of Independence Day with Children of Sri Aurobindo Shiksha Niketan and Distribution of 'Sewing & Tailoring' Certificates.
All members are requested to participate in the above programmes with their family members and frineds.
REGARDS.
Suresh Chand Gupta
Secretary
Sri Aurobindo Society, Noida Branch
Phone: 0120-3263313; 9818636362

Thursday, July 03, 2008

Santosh Verma is curating a Group show of 18 artists from Varanasi

A Santosh Verma piece is an invitation to enigma. The minimalism might not impress at the first encounter, but as you gaze the assiduously chiseled forms that tease geometry and symmetry begin to melt in a haze and newer approximations start swimming in from within the inter-stellar realm, as it were. Here translucent, there intransigent; they keep you engaged in a game of hide and seek engendering a spirit of intimacy and innocence. And the joy lingers.

Solo show of his recent works reflecting un-iterated idioms opens in Jehangir Art Gallery - Mumbai from August 26 to September 1, 2008


Wednesday, May 28, 2008

Talk by Vijay N. Poddar

From: "suresh gupta" scgsantosh@yahoo.com

A TALK ON SRI AUROBINDO'S YOGA
BY SRI VIJAY N. PODDAR
HAS BEEN ORGANISED AS UNDER :
DAY : SATURDAY
DATE : 24TH MAY, 08
TIME : 6.00 - 7.30 P.M.
Venue: SRI AUROBINDO BHAVAN

C-56/36 Sector 62, Noida.
All are requested to please join with your family and friends.

With regards
Suresh Chand Gupta
Secretary
Ph: 0120-3263313; 9818636362

SHRI VIJAY N. PODDAR
Shri Vijay N. Poddar, known as Vijay Bhai at Sri Aurobindo Society, had his entire education at Sri Aurobindo Ashram at Puducherry. He is an inmate of Sri Aurobindo Ashram, and Chairman of Sri Aurobindo Institute of Research and Social Sciences, a Research and Training wing of Sri Aurobindo Society, Puducherry. He is also Member of the Executive Committee of the Society.

Wednesday, February 06, 2008

India of 21st Century - Challenges of Old Age

From: "suresh gupta" scgsantosh@yahoo.com Date: Tue, 5 Feb 2008 21:24:58 -0800 (PST)
Subject: INVITATION : SATURDAY, THE 9TH FEB.'08
PROGRAMME AT SRI AUROBINDO BHAVAN, NOIDA.

Shri Vishwa Mohan Tiwari, Air Vice Marshal (Retd.) will give a talk on
'India of 21st Century - Challenges of Old Age" followed by Question - Answer session on Saturday, the 9th February, 2008 from 5.30 PM to 7.30PM at Sri Aurobindo Bhavan, C-56/36, Sector 62, Noida.

Shri T.N.Chaturvedi, Former Governor of Karnataka & Prof. Sidheswar Prasad, Former Governor of Tripura, have kindly consented to grace the occasion.
All are requested to participate in the programmes with members of their family and friends.

Regards. Suresh Chand Gupta
Joint Secretary, Sri Aurobindo Society, Noida Branch
C-56/36, Sector 62, Noida Phone: 0120-3263313; 9818636362

Tuesday, January 22, 2008

Sri Aurobindo Shiksha Niketan

From: "suresh gupta" scgsantosh@yahoo.com Subject: INVITATION: REPUBLIC DAY CELEBRATIONS AT SRI AUROBINDO BHAVAN. Date: Tue, 22 Jan 2008 03:30:23 -0800 (PST)
On the occasion of 58th Anniversary of India's 'REPUBLIC DAY', the following programmes are scheduled to be held at Sri Aurobindo Bhavan :
Day : Saturday
Date : 26th January, 2008
Venue : Sri Aurobindo Bhavan, C-56/36, Sector 62, Noida-201301
Programme: 10.00 a.m. to 11.30 a.m. Flag Hosting and celebration of Republic Day with Children of Sri Aurobindo Shiksha Niketan.
All members are requested to participate in the programmes with their family members and frineds. Regards.
Suresh Chand Gupta
Joint Secretary, Phone: 0120-3263313; 9818636362

Saturday, December 29, 2007

Devotional Songs on The Mother and Sri Aurobindo by Kuntala Dasgupta

From: "suresh gupta" scgsantosh@yahoo.com To: Tusar Mohapatra tusarnmohapatra@mail.com Subject: PROGRAMMES AT SRI AUROBINDO BHAVAN, NOIDA Date: Fri, 28 Dec 2007 03:16:54 -0800 (PST)
The following Programmes are scheduled at Sri Aurobindo Bhavan, C-56/36, Sector 62, Noida as per details given below:-
1. Saturday, the 29th December, 2007 from 6.15PM to 7.15 PM:
Mrs. Kuntala Dasgupta, a Member of SAS Noida and Devotee from Indirapuram will give a Programme of Devotional Songs / Bhajans on The Mother and Sri Aurobindo.

2. Sunday, the 30th December, 2007 from 6.15 to 7.15 PM
Shri Y.D. Mishra, Retired Principal and Shri P.K. Mishra will give a Programme of Devotional Songs / Poems / Geets etc.

3. Tuesday, the 1st January, 2008 from 9.30AM to 10.00 AM
New Year Special Collective Meditation.

All the Members are requested to attend along with their family members and friends. Wishing you all a very "Happy New Year 2008". REGARDS,
S.C. Gupta
Joint Secretary Phone: 0120-3263313

Saturday, December 01, 2007

Third Anniversary of Dedication of Sri Aurobindo Bhawan, Noida

Sri Aurobindo Society, Sri Aurobindo Bhavan, C-56/36, Sector 62, Noida.
From: suresh gupta scgsantosh@yahoo.com Subject: PROGRAMMES IN THE MONTH OF DECEMBER, 2007 AT SRI AUROBINDO SOCIETY, NOIDA BRANCH.
SAVE-A-DATE ; PROGRAMMES IN THE MONTH OF DECEMBER, '07 AT SRI AUROBINDO SOCIETY, NOIDA BRANCH:
  • SATURDAY, THE 1ST DECEMBER, '07 TO MONDAY, THE 3RD DECEMBER, '07: Three days Programme on Meditation by Shri Vishwa Mohan Tiwari, Air Vice Marshal (Retd.) Timing: 6.15PM to 7.15PM.
  • TUESDAY, THE 4TH DECEMBER, '07, A TALK ON 'REBIRTH - ITS MYSTERY' : A Talk on 'REBIRTH - ITS MYSTERY' by Ms. Deepshikha Ji, from Sri Aurobindo Ashram, Puducherry, on Tuesday, the 4th December, 2007 from 6.00PM to 7.30PM. The Talk will be preceded by Invocation and a Bhajan on The Mother by Ms. Deepshika Ji.
  • WEDNESDAY, THE 5TH DECEMBER, '07, COLLECTIVE MEDITATION: Special Collective Meditation will be held on Wednesday, the 5th December,'07 from 6.30PM to 7.00PM on the occasion of Sri Aurobindo's Mahasamadhi Divas.
  • MONDAY, THE 10TH DECEMBER, '07 TO FRIDAY, THE 14TH DECEMBER, '07, ACUPRESSURE TRAINING CAMP: Acupressure Training Camp has been scheduled from Monday, the 10th December, '07 to Friday, the 14th December, 07 between 1.00PM to 5.00PM.
  • TUESDAY, THE 11TH DECEMBER, '07, COLLECTIVE MEDITATION: Special Collective Meditation will be held on Tuesday, the 11th December,'07 from 6.30PM to 7.00PM on the occasion of Third Anniversary of Dedication of Sri Aurobindo Bhawan.
  • TUESDAY, THE 25TH DECEMBER: CELEBRATIONS OF CHIRSTMAS BY CHILDREN OF SRI AUROBINDO SHIKSHA NIKETAN: Children's Games / Programme on Tuesday, the 25th December, 2007 from 10.00 AM to 12.00 Noon.

WEEKLY SUNDAY MEDITATION & GROUP MEETING: 9.30AM TO 10.30AM ON EVERY SUNDAY.

All are requested to participate in the programmes with members of their family and friends.

Suresh Chand Gupta
Joint Secretary
Phone: 0120-3263313

Tuesday, August 07, 2007

135th Birth Anniversary of Sri Aurobindo

From: "suresh gupta" scgsantosh@yahoo.com To: Tusar Mohapatra tusarnmohapatra@mail.com CC: Subject: Programme at Sri Aurobindo Society, Noida Branch on Wednesday, the 15th August, 2007 Date: Mon, 6 Aug 2007 03:56:16 -0700 (PDT)
SAS/NB/Prog./07 6th August, ‘07

I_N_V_I_T_A_T_I_O_N

To celebrate the 135th Birth Anniversary of `Sri Aurobindo' and the 60th Anniversary of India's Independence, the following programmes are scheduled to be held at Sri Aurobindo Bhavan :
Day : Wednesday Date : 15th August, 2007 Venue : Sri Aurobindo Bhavan,
C-56/36, Sector 62, Noida
Programme 10.00 a.m. to 10.45 a.m.
Flag Salutation and celebration of Independence Day with Children of Sri Aurobindo Shiksha Niketan.
6.30 p.m. to 7.00 p.m.
To celebrate the Birthday of Sri Aurobindo, which is also a Darshan Day , Collective Meditation will be conducted at Sri Aurobindo Bhavan from 6.30 to 7.00 p.m.
All are requested to participate in both the programmes with their family members and frineds.
Suresh Chand Gupta
Joint Secretary Ph: 0120-3263313; 9818636362

Tuesday, June 26, 2007

मनुष्य के जीवन में सुचिता और पवित्रता

कथा व्यास अक्षयानंद महाराज ने यज्ञ की महत्ता को बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ की बहुत महत्ता है। यज्ञ त्यागवृत्ति को प्रोत्साहित करता है और परोपकार की भावना को जगाता है। श्री नारायण भक्ति ज्ञान सत्संग मंडल के तत्वाधान में इंदिरापुरम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को समापन हो गया। कथा के समापन पर सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा व्यास ने कहा कि यज्ञ करने से मनुष्य के जीवन में सुचिता और पवित्रता आती है। इसी तथ्य को समझकर ही ऋषि मुनियों ने प्राचीन काल से यज्ञ संस्कृति को प्रवर्तित और संवर्धित किया। कथा व्यास ने कहा कि यज्ञ हमारी भारतीय संस्कृति, धर्म एवं कर्मकांड का अभिन्न अंग है। कथा समापन के अवसर पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर दिवाकर मिश्रा, अनिल तिवारी, हेमंत वाजपेयी, सुनीता नागपाल, अनीता भारद्वाज, विश्वनाथ त्रिपाठी, बी.आर.यादव, अजय गुप्ता आदि उपस्थित थे। Posted by Azhar Pasha at 10:31 PM 0 comments
तुषार नाथ महापात्र
निदेशक, सावित्री एरा लरनिंग फोरम
SRA-102-C, शिप्रा रिविएरा
इंदिरापुरम, गाज़िआबाद - 201012
उत्तर प्रदेश, भारत
0210 - 2605636, 2815130

Saturday, June 02, 2007

Activities at Sri Aurobindo Society, Noida Branch

From: "suresh gupta" scgsantosh@yahoo.com
Swami Vidyanandji will deliver the next Talk on 'SCIENCE OF LIVING & MANTRIC HEALING' at Sri Aurobindo Bhavan, C-56/36, Sector 62 on Saturday, the 2nd June, 2007 from 6.30 P.M. to 8.00 P.M. All the Members are requested to make it convenient to participate alongwith their family members and friends. REGARDS.
S.C. Gupta, Joint Secretary
Sri Aurobindo Society, Noida Branch.
Phone: 0120-3263313; 9818636362
INVITATION TO PARTICIPATE IN ACTIVITIES AT SRI AUROBINDO SOCIETY, NOIDA BRANCH.
Sub: Activities at Sri Aurobindo Society, Noida Branch.
(Sri Aurobindo Bhavan, C-56/36, Sector 62, Noida)
Dear friends,

Presently, the following activities are held at Sri Aurobindo Bhavan. All interested persons are requested to participate in the same alongwith their family members and friends.

1. Library is open from 9.00 AM to 6.00 PM on all the seven days of the week. Library has rich collection of books and magazines, the collected works of Sri Aurobindo and The Mother and also spiritual books of other Authors of Repute. In the reading room, various periodicals are providing higher type of reading.

2. Meditation from 9.00 A.M. to 9.30 A.M. on every Sunday.

3. Talk on “Science of Living & Mantric Healing” by Swami Vidyanandji from 6.30 P.M. to 8.00 P.M. on Saturday, the 2nd June, 2007.

4. Video / Audio CDs from 6.00 P.M. to 7.00 P.M. : Monday to Friday on different spiritual aspects.

5. Yogasan & Pranayam from 6.00 PM to 7.00 PM : Monday to Friday.

6. Meditation Hall and Shrine is open from 6.00 AM to 7.30 PM on all the seven days.

For Sri Aurobindo Soceity,

S.C. Gupta
Jt. Secretary / 0120-3263313; 9818636362