Thursday, November 18, 2010

साधना एवं सिद्धि: SamayLive - 18 Nov 2010

साधना एवं सिद्धि  महर्षि अरविन्द ने अपनी पूर्ण योग रूपी सर्वांगपूर्ण पद्धति में बताया है कि जगत् और जीवन से बाहर निकलकर स्वर्ग या निर्वाण योग का लक्ष्य नहीं है, जीवन एवं जगत् को परिवर्तित करना ही पूर्ण योग है। पं. श्रीराम शर्मा आचार्य
साधक निम्न प्रकृति की सभी क्रियाओं, विभिन्न द्वन्द्वों, अविद्या के आक्रमण और अपने अज्ञान को इस दृष्टि से देखता है और उसे दूर करने हेतु प्रयत्न करता है। इस शुद्धि के फलस्वरूप मन की शांति, चित्त की स्थिरता, प्राण की एकाग्रता, ह्मदय की तन्मयता और विकारों से निष्कृति प्राप्त होती है, जो पूर्ण योग की आधार भूमि है। ऐसे शुद्ध, शांत, चंचल और नीरव आधार पर ही तो भागवत आनन्द, प्रेम, ज्ञान का अवरोहण संभव है। सर्वांगपूर्ण योग पद्धति के चार प्रमुख अंग हैं- शुद्धि, मुक्ति, सिद्धि और भुक्ति। साधना की प्रथम अनिवार्य आवश्यकता है-शुद्धि। इसका क्षेत्र अति विशाल है। यह अंत: और बाह्य दोनों के परिशोधन का प्रयास है। इससे जीवन को एक काल तक परिवर्तित भी कर लेते हैं। पूर्ण योग में शरीर ही नहीं मन, प्राण, अंत:करण अर्थात् सत्ता के समस्त अंगों का परिष्कार होता है। शुद्धि की शुरुआत होती है।

इसका दूसरा अंग है- मुक्ति। इसका तात्पर्य कहीं अन्य लोक-लोकान्तर में न पलायन है, न ही समस्त स्थूल क्रिया-कलापों अथवा प्रकृतिगत चेष्टाओं का परित्याग कर निर्वाण प्राप्त करना। यह आत्मा का, विभिन्न वासनाओं, शरीर बंधन एवं आकर्षणों से पहले हो जाना है। इसके दो पद हैं-त्याग और ग्रहण। इसमें एक है निषेधात्मक और दूसरा विधेयात्मक। प्रथम का अर्थ है, सत्ता की निम्न प्रकृति के बंधनों, आकर्षणों से छुटकारा। द्वितीय भावनात्मक पक्ष का तात्पर्य है- उच्च स्तर आध्यात्मिक सत्ता में समाहित होना। संसार भगवान् का लीला क्षेत्र है। इसका पलायन करके कोई भी यथार्थ में इस योग का योगी नहीं बन सकता है।
वासना और अहंता ही हैं अज्ञान की पिटारियां। इनसे ही छुटकारा पाना है। दूसरे शब्दों में, भगवान् के समान बनना ही मुक्ति का सम्पूर्ण एवं समग्र आशय है। शुद्धि एवं मुक्ति दोनों  'सिद्धि"  की पहले की अवस्थाएं हैं। पूर्णयोग में सिद्धि का अर्थ है भागवत् सत्ता की प्रकृति के साथ एकत्व की प्राप्ति। मायावादी सत्ता के सर्वोच्च सत्य निर्विकार निर्गुण एवं आत्म सचेतन ब्राहृ है। अतएवं आत्मा की शुद्ध, निर्विकार शान्ति एवं चेतनता में विकसित एकाकार होना ही उसकी सिद्धि है। सर्वांगपूर्ण योग में सिद्धि का तात्पर्य है-एक ऐसी दिव्य आत्मा और दिव्य कर्म को प्राप्त करना, जो विश्व में दिव्य संबंध एवं दिव्य कर्म का खुला क्षेत्र प्रदान करे। इसका समग्र अर्थ है- सम्पूर्ण प्रकृति को दिव्य बनाना तथा उसके अस्तित्व और कर्म की समस्त असत्य गुत्थियों का परित्याग।
भुक्ति का तात्पर्य श्री अरविन्द की दृष्टि में है- अनासक्त भाव से उपभोग। जीवन में दिव्य पूर्णता का अवतरण करना, सम्पूर्ण जीवन को आध्यात्मिक शक्ति का क्षेत्र मानकर दिव्य भोग करना ही भुक्ति का आंतरिक सार है। तभी सिद्धि संभव हो सकेगी, देव-मानव अतिमानव बन सकेगा। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज, हरिद्वार

Monday, November 15, 2010

Talk by Dr. D.N. Dani at Sri Aurobindo Bhavan, Noida on 20th November

From sriaurobindosociety noidabranch sriaurobindosocietynoida@gmail.com to "Tusar N. Mohapatra" tusarnmohapatra@gmail.com date 15 November 2010 14:24 subject A talk on 'INTEGRAL EDUCATION' by Dr. D.N. Dani, Chairman, Sri Aurobindo Society, Udaipur Centre.
Sir,
Sri Aurobindo Society, Noilda Branch is organizing a talk on 'Integral Education' by Dr. D.N. Dani, Chairman of Sri Aurobindo Society, Udaipur Centre on Saturday, 20th November, 2010.  Your kind presence in that alongwith family and friend is requested. REGARDS. In the service of The Mother, Suresh Chand Gupta
Executive Secretary
Sri Aurobindo Society, Noida Branch
Sri Aurobindo Bhavan,
C-56/36, Sector-62, Noida-201301 (U.P.)
Tel:-0120-3263313, (M) 09818636362

SAS/NB/Prog/RD/10  15th November, 2010 INVITATION Sub: Talk on ‘Integral Education’
Sri Aurobindo Soceity, Noida Branch is organizing a Talk on ‘INTEGRAL EDUCATION’ by Dr. D.N. Dani, Chairman, Sri Aurobindo Society, Udaipur Centre and former Vice-Principal, Vidyabhavan Shikshak Mahavidyalaya, Udaipur as per details given below:-
Day & Date:   Saturday, 20th November, 2010
Time:              5.30PM to 7.00PM
Place:              Sri Aurobindo Bhavan,                                                                         C-56/36, Sector 62,                                                                         Noida.                                     
All are requested to participate in the above programme  with family members and friends.

                                    ‘Sincerity is the key of the divine doors’
-         The Mother 

Suresh Chand Gupta
Executive Secretary
Phone: 0120-3263313    
PLANNED ACTIVITIES FOR NOVEMBER, 2010

Days
Programme

Time

MON. to SAT

Free Yogasan & Pranayam  by  Acharya V. N.  Pandey

7AM to 8AM            

MON to SAT

‘Our Prayer’ & Meditation

9AM to 9.30AM

MON, WED, FRI

Yogasan & Pranayam by Ms Smiriti Batra
(For Ladies)

9.30AM to 10.30AM

Every Sunday             

Collective Meditation; Spiritual Reading and  Bhajans


10AM to 11AM         

Every Saturday/
Sunday                      

Discussions on ‘GITA’ Led by Sh. Viswa Mohan Tiwari,
Air Vice Marshal (Retd.)


11AM to 01PM          

Every Sunday

Free Consultation and Eye Check-up by Dr. P.S. Chauhan.


11AM to 01PM

MON to FRI

Free Acupressure Treatment by Sh. G. P.  Shukla 


3.30 PM to
5.30 PM

17th Nov. ‘10
Wednesday

Mother’s Mahasamadhi Day -
Meditation

6PM to 6.30PM

20th Nov. ‘10
Saturday

Talk on ‘Integral Education’ by Dr. D.N. Dani, Chairman, Sri Aurobindo Society, Udaipur Centre and former Vice-Principal, Vidya Bhawan Shikshak Mahavidyalaya, Udaipur

5.30PM to 7PM

24th Nov. ‘10
Wednesday

Darshan Day – Siddhi Day
CD on  ‘Sri Aurobindo – A Life Divine’ &
Meditation

6PM to 7PM

27th Nov. ‘10
Saturday

Bhajan / Sangeet / CD-Bhagwat Muharat

6PM to 7PM

Note:
 i)   Meditation Hall opens everyday from 7AM to 7PM
ii)   Spiritual Library is open every day from 9AM to 6PM
iii)   SABDA publications and products from Auroshikha & Cottage Industry,                  Pondicherry are available at the Branch  everyday from 10AM to 6PM.

S.C. Gupta
Executive Secretary

Friday, November 12, 2010

इंदिरापुरम से एयरपोर्ट

नई दिल्ली, राज्य ब्यूरो : गाजियाबाद के इंदिरापुरम के लोग अब चौबीस घंटे इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट जा सकेंगे। दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) ने बृहस्पतिवार को विशेष 'एयरपोर्ट एक्सप्रेस बस सेवा' प्रारंभ की है, ...

इंदिरापुरम के जयपुरिया मॉल से बस का संचालन होगा। यहां से शुरू होकर इंदिरापुरम, नोएडा सेक्टर-62, 23/54, 12/22, 21, 10, 19, 27, डीएनडी फ्लाईओवर, आश्रम, लाजपत नगर, एम्स, अरबिंदो मार्ग, हौज खास (ग्रीन पार्क मेट्रो स्टेशन), आईआईटी गेट, जेएनयू, बसंत विहार, वसंत विलेज, एनएच-8, महिपालपुर, रेडिशन होटल होते हुए आईजीआई एयरपोर्ट टी-3 पर सेवा समाप्त होगी। यहीं से बसों की रवानगी भी होगी। जयपुरिया मॉल से सुबह 6.55 बजे से 9.55 बजे तक एक-एक घंटे की फ्रिक्वेंसी होगी, इसके बाद 30 मिनट की बस सेवा होगी। रात 12 बजे से सुबह 6.25 बजे तक एक घंटे की फ्रिक्वेंसी रहेगी।

Saturday, August 21, 2010

सिवनी में सुभद्रा कुमारी चौहान और महर्षि अरविन्द समारोह

सुभद्रा कुमारी चौहान और महर्षि अरविन्द समारोह 14-15 अगस्त, 2010 को सिवनी में
साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद, भोपाल के तत्वावधान में 14-15 अगस्त, 2010 को सिवनी में सुभद्रा कुमारी चौहान और महर्षि अरविन्द समारोह आयोजित किया जा रहा है।

साहित्य अकादमी के निदेशक प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल ने बताया कि भारतीय स्वतंत्रता और उसके बाद के जनमानस को अपनी कविता से आंदोलित करने वाली सुभद्रा कुमारी चौहान और महर्षि अरविन्द ऐसे तत्वदर्शी हैं, जिन्होंने भारतीय साहित्य को कई रूपों में प्रभावित किया है। अकादमी चाहती है कि यह प्रभाव जनता के सामने आये। अत: 14 अगस्त, 2010 की शाम 6.30 बजे सुभद्रा कुमारी चौहान का राष्ट्रीय, साहित्यिक एवं सामाजिक प्रदेय विषय पर प्रख्यात विद्वान डॉ. वीरेन्द्र नारायण यादव (छपरा-बिहार) की अध्यक्षता में विमर्श होगा। मुख्य अतिथि श्री राजेश त्रिवेदी, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद, सिवनी रहेंगे। डॉ. आर्या प्रसाद त्रिपाठी (चित्रकूट), डॉ. सत्येन्द्र शर्मा (सतना), डॉ. राजकुमार डफू (जबलपुर) उपर्युक्त विषय पर वक्तव्य देंगे।

15 अगस्त, 2010 की सुबह 10 बजे सुभद्रा कुमारी चौहान की कार दुर्घटना स्थल पर पुष्पांजलि का कार्यक्रम आयोजित किया जायेगा। इसी दिन शाम 6.30 बजे भारतीय दार्शनिक परम्परा एवं साहित्य में महर्षि अरविन्द का प्रदेय विषय पर आख्यान का कार्यक्रम स्थानीय विधायक माननीया श्रीमती नीता पटेरिया के मुख्य आतिथ्य में एवं डॉ. सावित्री सिन्हा (जबलपुर) की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. दीनानाथ शुक्ल (जबलपुर), डॉ. मीनाक्षी स्वामी (इंदौर), डॉ. प्रदीप खरे (भोपाल) उपर्युक्त विषय पर व्याख्यान देंगे। स्थानीय समन्वयक के रूप में डॉ. अर्चना चंदेल कार्य करेंगी।

साहित्य अकादमी के निदेशक प्रो. त्रिभुवननाथ शुक्ल ने सभी बुद्धिजीवियों, लेखकों, चिंतकों-विचारकों, शोधार्थियों और पाठकों से अपील की है कि इस समारोह में पधारकर अवश्य लाभ लें। उमा भार्गव

Sunday, August 15, 2010

योग और अध्यात्म में रम गए अरविंद

स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान प्रखर राष्ट्रवाद की भावना से जनता को जबरदस्त रूप से आंदोलित करने वाले अरविंद जब इस बात पर पूरी तरह आश्वस्त हो गए कि अब स्वाधीनता का उद्देश्य उनके बगैर भी पूरा हो जाएगा तब वह योग और अध्यात्म में रम गए.
अरविंद आश्रम से निकलने वाली पत्रिका ‘कर्मधारा’ के सह संपादक त्रियुगी नारायण के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि श्री अरविंद जब अलीपुर जेल में थे तब उन्हें साधना के दौरान भगवान कृष्ण के दर्शन हुए जिन्होंने उनसे कहा कि अब स्वाधीनता का कार्य तुम्हारे बगैर भी पूरा हो जाएगा. इस प्रकार वह योग और अध्यात्म में रम गए.
नारायण ने कहा कि उन पर जेल में स्वामी विवेकानंद के व्याख्यान का भी गंभीर असर पड़ा. हालांकि उनमें योग के प्रति अनुराग पहले से पनप रहा था.
प्रकृति में गहन विश्वास करने वाले महर्षि अरविंद मानते थे कि मानव का विकास अतिमानव के रूप में करना है जहां वह विभिन्न बंधनों से मुक्त होगा.
अरविंद घोष का जन्म कलकत्ता में 15 अगस्त 1872 में हुआ था. उनके पिता डॉ. कृष्ण धन घोष अंग्रेजी शिक्षा के कट्टर समर्थक थे इसलिए उन्होंने अरविंद को सात साल की उम्र में उनके भाइयों के साथ ब्रिटेन भेज दिया. ब्रिटेन में अरविंद ने बेहद अभाव में बचपन गुजारा क्योंकि उनके डॉक्टर पिता अक्सर अपने बच्चों को मासिक खर्च भेजना भूल जाते थे.
ब्रिटेन में शिक्षा के बाद वह पिता की इच्छा पूरी करने के लिए आईसीएस की परीक्षा में बैठे. लेकिन दो वर्ष की परिवीक्षा अवधि के दौरान उनके दिमाग में यह बात बैठ गयी कि उन्हें ब्रिटिश सरकार की सेवा नहीं करनी है और वह घुड़सवारी की परीक्षा में जानबूझकर शरीक नहीं हुए जिससे वह ब्रिटिश सरकार की प्रशासनिक सेवा में जाने से बच गये.
अरविंद 1893 में भारत वापस लौट आये. उनके पहुंचने से पहले एक बहुत बड़ा हादसा यह हुआ कि एजेंट ने उनके पिता को यह गलत सूचना दे दी कि जिस जहाज से अरविंद मुम्बई आ रहे थे वह पुर्तगाल में डूब गया. इस सदमे को उनके पिता बर्दाश्त नहीं कर पाए और चल बसे.
भारत पहुंचने पर अरविंद को बड़ौदा स्टेट की प्रशासनिक नौकरी मिली. वह विभिन्न प्रशासनिक विभागों के अलावा बड़ौदा कालेज में अंग्रेजी भी पढ़ाते थे. उनके शिष्यों में कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी जैसे कुछ योग्य शिष्य शामिल थे. इसके साथ ही वह हिंदी, संस्कृत और बांग्ला का गहन अध्ययन करने लगे जिनसे वह इंग्लैंड में वंचित हो गए थे. उन्होंने 1906 तक बड़ौदा स्टेट की नौकरी की. नौकरी के दौरान ही वह पर्दे के पीछे से स्वतंत्रता आंदोलन की राजनीति में भी दिलचस्पी लेने लगे.
स्वतंत्रता आंदोलन में भी उनकी अहम भूमिका रही. इतिहास के सेवानिवृत्त प्राध्यापक डा पी पी गुप्ता बताते हैं, ‘बड़ौदा से कोलकाता आने के बाद महर्षि अरविंद आजादी के आंदोलन में उतरे. कोलकाता में उनके भाई बारिन ने उन्हें बाघा जतीन, जतीन बनर्जी और सुरेंद्रनाथ टैगोर जैसे क्रांतिकारियों से मिलवाया. उन्होंने 1902 में उनशीलन समिति ऑफ कलकत्ता की स्थापना में मदद की. उन्होंने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक के साथ कांग्रेस में गरमपंथी धड़े की विचाराधारा को भी हवा दी.’
डा गुप्ता के अनुसार, अरविंद ने बंगाल विभाजन के खिलाफ आंदोलन में बढ़चढ़ हिस्सा लिया और इसके लिए लोगों को एकजुट करने के लिए उन्होंने राखियां बंधवाने का कार्यक्रम चलाया एवं हिंदू मुस्लिम एकता की अच्छी मिसाल पेश की.’ अरविंद घोष के विचार बहुत ही क्रांतिकारी थे. उन्होंने लिखा है, ‘राजनीतिक स्वतंत्रता राष्ट्र की प्राण वायु है. राजनीतिक स्वतंत्रता के लक्ष्य के बगैर सामाजिक सुधार, शैक्षणिक सुधार, औद्योगिक विस्तार और नस्ल का नैतिक सुधार बहुत बड़ी लापरवाही और व्यर्थ है.’
अरविंद का नाम 1905 के बंगाल विभाजन के बाद हुए क्रांतिकारी आंदोलन से जुड़ा और 1908-09 में अलीपुर बम कांड मुकदमा चला. इस दौरान जेल में रहने के समय उन्हें विशिष्ट आध्यात्मिक अनुभूतियां हुई. जेल से निकलने के बाद वह 1910 में चंदननगर होते हुए पांडिचेरी चले गये. पांडिचेरी में उन्होंने अपने को सार्वजनिक जीवन से पूरी तरह अलग करते हुए आध्यात्मिक साधना और लेखन तक सीमित रखा.
पांडिचेरी में 1914 में मीरा नामक फ्रांसीसी महिला की अरविंद से पहली बार मुलाकात हुई जिन्हें बाद में अरविंद ने अपने आश्रम के संचालन का पूरा भार सौंप दिया. अरविंद और उनके सभी अनुयायी उन्हें आदर के साथ ‘मदर’ कहकर पुकारने लगे.
अरविंद का देहांत पांच दिसंबर 1950 को हुआ. बताया जाता है कि निधन के बाद चार दिन तक उनके पार्थिव शरीर में दिव्य आभा बने रहने के कारण उनका अंतिम संस्कार नहीं किया गया और अंतत: नौ दिसंबर को उन्हें आश्रम में समाधि दी गयी. 

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नई दिल्ली, 14 अगस्त 2010

गाजियाबाद और आजादी

हिंडन किनारे लड़ी गई थी आजादी की पहली जंग नवभारत टाइम्स
हिंडन नदी के पुल से गाजियाबाद की ओर जाने वाली सड़क पर एक कब्रिस्तान है, जहां एक दर्जन अंग्रेज सिपाहियों के शवों को दफनाया गया है। इतिहासकारों के मुताबिक मेरठ में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ विद्रोह के खिलाफ सेना को अंग्रेजों ने दिल्ली से भेजा था। जैसे ही अंग्रेजी सेना हिंडन नदी के तट पर पहुंची अचानक क्रांतिकारियों ने उन्हें रोक लिया। उमराव सिंह, माखन सिंह, जय सिंह, दौलत सिंह, सुमेर सिंह, चंदन सिंह, दलेल सिंह से नेतृत्व में देशभक्त दो दिनों तक लड़ते रहे
हौसले और एकजुटता की मिसाल बन गए थे 5 गांव नवभारत टाइम्स
गाजियाबाद के मुरादनगर ब्लॉक में पांच ऐसे गांव हैं, जहां के क्रांतिकारियों ने अंग्रेज सिपाहियों की नाक में दम कर दिया था। अंग्रेजों ने इन गांवों के लोगों पर बेइंतिहा जुल्म किए, मगर न तो ये टूटे और न ही झुके।गाजियाबाद 1976 से पहले तक मेरठ जिले का हिस्सा था। 1857 से यहां जो आजादी की बयार चली, 1947 तक चलती रही। मुरादनगर ब्लॉक में हिंडन किनारे बसे पांच गांव ग्यासपुर, कुम्हेड़ा, सुहाना, खिंदौड़ा और भनेड़ा के लोग भी स्वतंत्रता ...

Monday, June 28, 2010

Talk by Dholakia on July 10 at Sri Aurobindo Society, Noida

From sriaurobindosociety noidabranch sriaurobindosocietynoida@gmail.com
To "Tusar N. Mohapatra" tusarnmohapatra@gmail.com date 28 June 2010 16:06
subject PROGRAMME AT SRI AUROBINDO BHAVAN, SECTOR 62, NOIDA ON 10TH JULY, 2010 FROM 6PM TO 7.30PM
GOLDEN JUBILEE OF SRI AUROBINDO SOCIETY 19-09-2009-19-09-2010

INVITATION: Talk on ‘Aantrik Shanti & Ananda –’  by Shri Hans Dholakiaji
You, with family and friends, are invited to attend a talk on
‘AANTRIK SHANTI & ANANDA’  delivered by Shri Hans Dholakiaji.
Venue of talk: Sri Aurobindo Bhavan, C-56/36,
Sector 62, Noida Date: Saturday, 10th July, 2010 Time: 6 P.M.  To 7.30 P.M.
Brief Profile of Shri Hans Dholakiaji
Shri Hans Dholakia began this motivational work around 1997 and later founded HOLISTIC HEALTH & LUMINOUS LEARNING INC, in Noida, India. He is a qualified engineer, with nearly 37 years' experience in sales / marketing, having last worked at Director / Vice President  levels. He also has nearly 25 years' parallel exposure to Yoga and meditation. He knows 6 languages, writes poetry and believes that all religions are true. He loves blending recent research in neuro-sciences and management thinking with timeless spiritual values common to all faiths and the actionable techniques in the super-science of Yoga-Meditation.
He conducts regular coaching in integrated Yoga-Meditation / Motivational Counseling / Holistic Destressing and Personal Growth etc. He also conducts motivational training programs in corporates / institutions on holistic self-management/ self-development, leadership, balanced living, etc.  He can be visited at www.hansyoga.com

In the service of The MotherSuresh Chand Gupta
Executive Secretary, Sri Aurobindo Society, Noida Branch
Sri Aurobindo Bhavan, C-56/36, Sector-62, Noida-201301 (U.P.)
Tel:-0120-3263313, (M) 09818636362

Tuesday, May 25, 2010

गनपत सहाय कालेज में श्रीअरविंद अध्ययन केन्द्र का शुभारंभ

Jagran - Yahoo! India - News May 24, 12:56 am 
चेतनतत्व में होती है रचनाधर्मिता
सुल्तानपुर, 23 मई : इलाहाबाद विश्वविद्यालय के अवकाश प्राप्त दर्शन शास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो.डीएन द्विवेदी ने कहा कि चेतना आदि और अंत दोनों में है। रचनाधर्मिता चेतनतत्व में है, जड़ तत्व में नहीं। वे रविवार को गनपत सहाय परास्नातक महाविद्यालय परिसर में यूजीसी द्वारा मान्यता प्राप्त श्री अरविंद अध्ययन केन्द्र के उद्घाटन समारोह को बतौर मुख्य अतिथि सम्बोधित कर रहे थे।
आज गनपत सहाय कालेज में श्रीअरविंद अध्ययन केन्द्र का विधिवत शुभारंभ हो गया। प्राचार्य डा.पीबी सिंह के संयोजन में समारोह की अध्यक्षता कर रहे गोरखपुर विश्वविद्यालय के पूर्व अंग्रेजी विभागाध्यक्ष प्रो.प्रताप सिंह मुख्य अतिथि इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त दर्शनशास्त्र विभागाध्यक्ष प्रो.डीएन द्विवेदी ने श्री मां श्री अरविंद के चित्र पर माल्यार्पण दीप जलाकर समारोह की शुरूआत की। प्रो.डीएन द्विवेदी ने कहा कि दैवीय सत्ता की अभिव्यक्ति जड़ और चेतन सभी पदार्थो में समान रूप से हो रही है। चेतना आदि और अंत दोनों में है। बिना दिव्य चेतना के जड़ परमाणु जगत की रचना करने में समर्थ नहीं। रचनाधर्मिता चेतन तत्व में है। जड़ तत्व में नहीं। श्री अरविंद के इस विचार को वैज्ञानिक भी मानने लगे हैं। चेतना की मानसिक यात्रा चलती है और अतिमानकीय धरातल पर पहुंचकर प्रभु का दीदार कराती है। गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो.प्रताप सिंह ने गीता दर्शन को संदर्भित करते हुए कहा कि हम िरंतर जीवन यात्रा पर हैं। भ्रमण करते-करते सत्य से भटक जाते हैं। श्री अरविंद ने एक जगह कहा है कि जो कुछ मेरा है वह सब परमात्मा का है। केन्द्र के निदेशक डा.दुर्गादत्त पाण्डेय ने कहा कि दिव्य यात्रा परिपूर्ण बनने की यात्रा है। जिसका लक्ष्य है भीतर के देवत्व जगाना। श्री अरविंद सोसायटी के यूपी उत्तराखण्ड अध्यक्ष डा.जेपी सिंह ने श्री अरविंद के समग्र योग की प्रासंगिकता पर विचार प्रकट किया। डा.डीपी सिंह ने कार्यक्रम संचालन किया। महाविद्यालय अध्यक्ष यदुनाथ प्रसाद श्रीवास्तव, डा.अरविंद चतुर्वेदी आदि विशिष्टजन मौजूद रहे।

बेरमो कोयलांचल अंतर्गत कारगली में, अंतर्राष्ट्रीय संस्था श्री अरविंद सोसायटी की बेरमो शाखा के सदस्यों ने माता मीरा अलफांसा के जापान से भारत (पाण्डेचरी) आगमन की याद में दर्शन ...